या ग़ौस हो तुम अब्दुल क़ादिर इतना ही सहारा काफ़ी है / Ya Ghous Ho Tum Abdul Qadir Itna Hi Sahara Kafi Hai
या ग़ौस ! हो तुम अब्दुल क़ादिर, इतना ही सहारा काफ़ी है हम क़ादरियों को मुश्किल में बस नाम तुम्हारा काफ़ी है बग़दाद के गुलशन में जा कर जन्नत की तमन्ना कौन करे या ग़ौस ! तुम्हारे रौज़े का 'आशिक़ को नज़ारा काफ़ी है सूखी हुई खेती फल जाए, आई हुई आफ़त टल जाए रहमत भरी ऊँगली का तेरी बस एक इशारा काफ़ी है पीर-ए-पीराँ मीर-ए-मीराँ ग़ौस-उल-आ'ज़म शाह-ए-जीलाँ ! हर वक़्त मुरीदों को तेरे, तेरा ही सहारा काफ़ी है दुनिया-तलबी से हूँ मैं जुदा, अंदाज़ फ़क़ीराना है ज़िया ! सरकार की भीक पे हो जाए दुनिया में गुज़ारा, काफ़ी है ना'त-ख़्वाँ: हुसैन यूसुफ़ मेमन ya Gaus ! ho tum abdul qaadir, itna hi sahaara kaafi hai ham qaadriyo.n ko mushkil me.n bas naam tumhaara kaafi hai baGdaad ke gulshan me.n jaa kar jannat ki tamanna kaun kare ya Gaus ! tumhaare rauze ka 'aashiq ko nazaara kaafi hai sookhi hui kheti phal jaae, aai hui aafat Tal jaae rahmat bhari ungli ka teri bas ek ishaara kaafi hai peer-e-peeraa.n meer-e-meeraa.n Gaus-ul-aa'zam shaah-e-jeelaa.n ! har waqt mureedo.n ko tere, t...