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आक़ा मदीनावाळा क्यारे बोलावशो / આકા મદીનાવાળા ક્યારે બોલાવશો / Aaqa Madina Wara Kyare Bolawsho

આકા મદીનાવાળા ! આપ બતાવો ક્યારે બોલાવશો, આકા ! ક્યારે બોલાવશો ? તયબાની યાદમાં દિલડું તડપે છે ક્યારે જોવડાવશો, આકા ! ક્યારે જોવડાવશો ? આકા મદીનાવાળા ! આપ બતાવો ક્યારે બોલાવશો, આકા ! ક્યારે બોલાવશો ? લીલો લીલો ગુંબદ ને સોનેરી જાળી મિમ્બર ને દ્વાર વચ્ચે જન્નતની ક્યારી આવી જા જોવા એવું ક્યારે સંભળાવશો ? ક્યારે સંભળાવશો, આકા ! ક્યારે સંભળાવશો ? આકા મદીનાવાળા ! આપ બતાવો ક્યારે બોલાવશો, આકા ! ક્યારે બોલાવશો ? તયબાની યાદમાં ના'તો લખે છે દાસ તમારો એને ગાતો રહે છે આપના દ્વારે એને ક્યારે ગવડાવશો ? ક્યારે ગવડાવશો, આકા ! ક્યારે ગવડાવશો ? આકા મદીનાવાળા ! આપ બતાવો ક્યારે બોલાવશો, આકા ! ક્યારે બોલાવશો ? પાપોનાં દલદલમાં એવો ફસાણો સત કર્મોથી હું તો સાવ અજાણો પાપોની ટેવ મારી ક્યારે છોડાવશો ? ક્યારે છોડાવશો, આકા ! ક્યારે છોડાવશો ? આકા મદીનાવાળા ! આપ બતાવો ક્યારે બોલાવશો, આકા ! ક્યારે બોલાવશો ? તયબા વાસીઓને જ્યારે હું મળ્યો સાંભળીને વાતો ત્યાંની મનમાં હું રડ્યો મેહમાન ત્યાંનો મને ક્યારે બનાવશો ? ક્યારે બનાવશો, આકા ! ક્યારે બનાવશો ? આકા મદીનાવાળા ! આપ બતાવો ક્યારે બોલાવશો, ...

तुम ज़ात-ए-ख़ुदा से न जुदा हो न ख़ुदा हो / Tum Zaat-e-Khuda Se Na Juda Ho Na Khuda Ho

तुम ज़ात-ए-ख़ुदा से न जुदा हो न ख़ुदा हो अल्लाह को मा'लूम है क्या जानिए क्या हो ये क्यूँ कहूँ मुझ को ये 'अता हो ये 'अता हो वो दो कि हमेशा मेरे घर भर का भला हो जिस बात में मशहूर-ए-जहाँ है लब-ए-'ईसा ऐ जान-ए-जहाँ ! वो तेरी ठोकर से अदा हो टूटे हुए दम, जोश पे तूफ़ान-ए-म'आसी दामन न मिले उन का तो क्या जानिए क्या हो यूँ झुक के मिले हम से कमीनों से वो जिस को अल्लाह ने अपने ही लिए ख़ास किया हो मिट्टी न हो बर्बाद पस-ए-मर्ग, इलाही ! जब ख़ाक उड़े मेरी मदीने की हवा हो मँगता तो है मँगता कोई शाहों में दिखा दे जिस को मेरे सरकार से टुकड़ा न मिला हो क़ुदरत ने अज़ल में ये लिखा उन की जबीं पर जो उन की रज़ा हो वही ख़ालिक़ की रज़ा हो हर वक़्त करम बंदा-नवाज़ी पे तुला है कुछ काम नहीं इस से बुरा हो कि भला हो सौ जा से गुनहगार का हो रख़्त-ए-'अमल चाक पर्दा न खुले गर तेरे दामन से बंधा हो अबरार निको-कार ख़ुदा के हैं ख़ुदा के उन का है वो उन का है जो बद हो जो बुरा हो ऐ नफ़्स ! उन्हें रंज दिया अपनी बदी से क्या क़हर किया तू ने, अरे तेरा बुरा हो अल्लाह यूँही 'उम्र गुज़र जाए गदा की सर ख़म हो ...

तुझे रब ने क्या बनाया मक्का मदीने वाले / Tujhe Rab Ne Kya Banaya Makka Madine Wale

तुझे रब ने क्या बनाया, मक्का-मदीने वाले ! ये कोई समझ न पाया, मक्का-मदीने वाले ! तेरा फ़ैज़-ए-'आम जारी, तेरी ज़िंदगी निराली तुझे हर वली में पाया, मक्का-मदीने वाले ! कहा सब ने नफ़्सी-नफ़्सी, तेरे लब पे रब्बि-हब-ली तेरे पाए का न पाया, मक्का-मदीने वाले ! न कोई बता सका है, न कोई बता सकेगा तुझे रब ने कब बनाया, मक्का-मदीने वाले ! है दु'आ-ए-अहल-ए-सुन्नत कि जहान-ए-रंग-ओ-बू में रहे सय्यिदों का साया, मक्का-मदीने वाले ! सवा लाख अंबिया हों या हज़ारों हूर-ओ-ग़िल्माँ तेरा गीत सब ने गाया, मक्का-मदीने वाले ! ये सभी का है 'अक़ीदा कि ब-क़ौल-ए-आ'ला-हज़रत तुझे यक ने यक बनाया, मक्का-मदीने वाले ! ये है फ़ातिमा का सदक़ा, मैं तेरे नसब का हिस्सा मुझे हाशमी बनाया, मक्का-मदीने वाले ! शायर: सय्यिद हाशमी मियाँ ना'त-ख़्वाँ: मुईन क़ादरी बैंगलोर tujhe rab ne kya banaaya, makka-madine waale ! ye koi samajh na paaya, makka-madine waale ! tera faiz-e-'aam jaari, teri zindagi niraali tujhe har wali ne paaya, makka-madine waale ! kaha sab ne nafsi-nafsi, tere lab pe rabbi-...

ये मेहर-ओ-माह सितारों की दिल-कशी क्या है / Ye Mehr-o-Mah Sitaron Ki Dilkashi Kya Hai

ये मेहर-ओ-माह सितारों की दिल-कशी क्या है नबी के हुस्न के आगे ये चाँदनी क्या है नबी की ना'त पढ़ी जा रही है महफ़िल में ज़रा बताइए लब पर ये ख़ामोशी क्या है अगर है आना तो आना नबी के रौज़े पर ऐ मौत ! तुझ को बताऊँगा ज़िंदगी क्या है नबी के शहर में जन्नत तलाश करता है ज़रा मुझे तो बता उस जगह कमी क्या है लगा के तख़्त को ठोकर कहा ये शाहों ने तेरी गदाई के आगे शहनशही क्या है नबी के 'इश्क़ ने लफ़्ज़ों को कर दिया अनमोल नबी की ना'त है वर्ना ये शा'इरी क्या है हैं जिस के मौला नबी, उस के हैं 'अली मौला अब इस में और समझना है क्या, 'अली क्या है ख़मोश रह के वो दुश्मन को मात देते थे इसी से जान लो मे'यार-ए-अज़हरी क्या है पहन के बैठे हैं गुलज़ार जुब्बा-ए-मौला इसी से जान लो गुलज़ार वास्ती क्या है ना'त-ख़्वाँ: असद इक़बाल कलकत्तवी सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वी ye mehr-o-maah sitaaro.n ki dil-kashi kya hai nabi ke husn ke aage ye chaandni kya hai nabi ki naa't pa.Dhi jaa rahi hai mehfil me.n zara bataaiye lab par ye KHaamoshi kya hai agar hai aana to aan...

मुस्तफ़ा ख़ैर-उल-वरा हो / Mustafa Khair-ul-wara Ho

मुस्तफ़ा ! ख़ैर-उल-वरा हो सरवर-ए-हर-दो-सरा हो अपने अच्छों का तसद्दुक़ हम बदों को भी निबाहो किस के फिर हो कर रहें हम गर तुम्हीं हम को न चाहो बद हँसें तुम उन की ख़ातिर रात भर रोओ कराहो बद करें हर दम बुराई तुम कहो उन का भला हो हम वही ना-शुस्ता-रू हैं तुम वही बहर-ए-'अता हो हम वही शायान-ए-रद हैं तुम वही शान-ए-सख़ा हो हम वही बे-शर्म-ओ-बद हैं तुम वही कान-ए-हया हो हम वही नंग-ए-जफ़ा हैं तुम वही जान-ए-वफ़ा हो हम वही क़ाबिल सज़ा के तुम वही रहम-ए-ख़ुदा हो चर्ख़ बदले, दहर बदले तुम बदलने से वरा हो अब हमीं हों सहव हाशा ऐसी भूलों से जुदा हो 'उम्र भर तो याद रक्खा वक़्त पर क्या भूलना हो वक़्त-ए-पैदायिश न भूले कैफ़-यन्सा क्यूँ क़ज़ा हो ये भी, मौला ! 'अर्ज़ कर दूँ भूल अगर जाओ तो क्या हो वो हो जो तुम पर गिराँ है वो हो जो हरगिज़ न चाहो वो हो जिस का नाम लेते दुश्मनों का दिल बुरा हो वो हो जिस के रद की ख़ातिर रात-दिन वक़्फ़-ए-दु'आ हो मर मिटें बर्बाद बंदे ख़ाना आबाद आग का हो शाद हो इब्लीस मल'ऊँ ग़म किसे इस क़हर का हो तुम को हो वल्लाह तुम को जान-ओ-दिल तुम पर फ़िदा हो तुम को ...

या मुस्तफ़ा ख़ैर-उल-वरा तेरे जेआ कोई नहीं / Ya Mustafa Khair-ul-wara Tere Jeya Koi Nahin

या मुस्तफ़ा ख़ैर-उल-वरा ! तेरे जेआ कोई नहीं किह्नूँ कह्वाँ तेरे जेआ, तेरे जेआ कोई नहीं तेरे जेआ सोहणा नबी लब्भाँ ते ताँ जे होवे कोई मैनूँ ते है एनाँ पता, तेरे जेआ कोई नहीं अक़्सा दे विच, आक़ा मेरे ! पढ़ के नमाज़ पिछे तेरे नबियाँ ने वी एहो कह्या, तेरे जेआ कोई नहीं गोदी च ले के सरकार नूँ, सोहणे मिठल मँठार नूँ आखे हलीमा सा'दिया, तेरे जेआ कोई नहीं मन मोहणियाँ नबी सोहणियाँ ! क़ुरआन है तेरा ना'त-ख़्वाँ 'अरब-ओ-'अजम दे वालिया, तेरे जेआ कोई नहीं रब नईं कह्या तेरा मोड़ दा, दिल नईं कदी तेरा तोड़ दा मन दा ख़ुदा तेरी रज़ा, तेरे जेआ कोई नहीं होवे फ़क़ीर या बादशाह भावें गदा नियाज़ी जेआ सब खौंदे ने सदक़ा तेरा, तेरे जेआ कोई नहीं शायर: अब्दुल सत्तार नियाज़ी ना'त-ख़्वाँ: सय्यिद फ़सीहुद्दीन सोहरवर्दी ओवैस रज़ा क़ादरी ya mustafa KHair-ul-wara ! tere jeya koi nahi.n kihnu.n kahwaa.n tere jeya, tere jeya koi nahi.n tere jeya sohna nabi labbhaa.n te taa.n je howe koi mainu.n te hai enaa.n pata, tere jeya koi nahi.n aqsa de wich, aaqa mere ! pa.Dh ke namaaz pichhe tere n...

ऐ मुजाहिद-ए-नबी नात गुनगुनाए जा | हक़ अल्लाह हक़ अल्लाह / Aye Mujahid-e-Nabi Naat Gungunaye Ja | Haq Allah Haq Allah

हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह ऐ मुजाहिद-ए-नबी ! ना'त गुनगुनाए जा नग़्मा-ए मुहम्मदी झूम कर सुनाए जा दो जहाँ पे छाए जा, ज़र्ब-ए-हक़ लगाए जा हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह परचम-ए-नबी उठा ले ख़ुदा का आसरा दर्स-ए-मुर्शिदी है ये, हक़ पे ज़िंदगी लुटा हक़ पे जाँ लुटाए जा, ज़र्ब-ए-हक़ लगाए जा हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह बात कर तू बा'द में, पहले तू सलाम कर जो तेरे बुज़ुर्ग हैं, उन का एहतिराम कर उन से फ़ैज़ पाए जा, ज़र्ब-ए-हक़ लगाए जा हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह शुक्र कर ख़ुदा का तू, तुझ को ये वतन मिला पाक सरज़मीं मिली और ये चमन मिला सर को तू झुकाए जा, ज़र्ब-ए-हक़ लगाए जा हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह झूट बोलना नहीं तुम कभी ज़ुबान से ला'नत-ए-ख़ुदा है ये, देख लो क़ुरआन से सच के गीत गाए जा, ज़र्ब-ए-हक़ लगाए जा हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह अपने मुर्शिदी का दिल इस तरह से शाद कर जो सबक़ मिले तुझे, तू दिल लगा के याद कर उन से फ़ैज़ पाए जा, ज़र्ब-ए-हक़ लगाए जा हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह आए ...

अल्लाह हू अल्लाह हू दम-ब-दम अल्लाह हू / Allah Hoo Allah Hoo Dam Ba Dam Allah Hoo

अल्लाह हू अल्लाह हू दम-ब-दम अल्लाह हू हर जगह हर घड़ी हर क़दम अल्लाह हू लम्हा लम्हा बसर हो तेरे ज़िक्र में ज़िंदगी का सफ़र हो तेरे ज़िक्र में बस ज़बाँ नग़्मा-गर हो तेरे ज़िक्र में दिल में रौशन हो शम'-ए-हरम अल्लाह हू अल्लाह हू अल्लाह हू दम-ब-दम अल्लाह हू हर जगह हर घड़ी हर क़दम अल्लाह हू हर कली हर समर लहलहाते शजर चाँदनी कहकशाँ नूरी शम्स-ओ-क़मर ये ज़मीं ये फ़लक बल्कि हर ख़ुश्क-ओ-तर कर रहे हैं सना सब बहम अल्लाह हू अल्लाह हू अल्लाह हू दम-ब-दम अल्लाह हू हर जगह हर घड़ी हर क़दम अल्लाह हू 'अज़मतों रिफ़'अतों के निशाँ तेरे हैं ऐ ख़ुदा ! ये ज़मीं आसमाँ तेरे हैं मालिक-ए-दो-जहाँ ! इंस-ओ-जाँ तेरे हैं तू हमारा है और तेरे हम अल्लाह हू अल्लाह हू अल्लाह हू दम-ब-दम अल्लाह हू हर जगह हर घड़ी हर क़दम अल्लाह हू उस की क़ुदरत किरन दर किरन दर किरन उस की नकहत चमन दर चमन दर चमन उस की मिदहत पवन दर पवन दर पवन लिख, उजागर ! क़लम ब-क़लम अल्लाह हू अल्लाह हू अल्लाह हू दम-ब-दम अल्लाह हू हर जगह हर घड़ी हर क़दम अल्लाह हू शायर: अल्लामा निसार अली उजागर ना'त-ख़्वाँ: ओवैस रज़ा क़ादरी allah hoo ...