तेरी मदह-ख़्वाँ हर ज़बाँ ग़ौस-ए-आज़म / Teri Madh-Khwan Har Zabaan Ghaus-e-Azam
रौनक़-ए-कुल-औलिया, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर ! पेशवा-ए-अस्फ़िया, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर ! तेरी मदह-ख़्वाँ हर ज़बाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! तेरा नाम मोमिन की जाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! या महबूब-ए-सुब्हानी ! तुम हो क़ुत्ब-ए-रब्बानी या महबूब-ए-सुब्हानी ! तुम हो क़ुत्ब-ए-रब्बानी पनाह-ए-ग़रीबाँ तेरी ज़ात-ए-वाला तेरा घर है दारुल-अमाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! तेरी मदह-ख़्वाँ हर ज़बाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! तेरा नाम मोमिन की जाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! या महबूब-ए-सुब्हानी ! तुम हो क़ुत्ब-ए-रब्बानी या महबूब-ए-सुब्हानी ! तुम हो क़ुत्ब-ए-रब्बानी ज़माना न क्यूँकर हो मेहमाँ कि तुम ने बिछाया है रहमत का ख़्वाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! तेरी मदह-ख़्वाँ हर ज़बाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! तेरा नाम मोमिन की जाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! या महबूब-ए-सुब्हानी ! तुम हो क़ुत्ब-ए-रब्बानी या महबूब-ए-सुब्हानी ! तुम हो क़ुत्ब-ए-रब्बानी जिसे शक हो वो ख़िज़्र से पूछ देखे तेरी मजलिसों का समाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! तेरी मदह-ख़्वाँ हर ज़बाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! तेरा नाम मोमिन की जाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! या महबूब-ए-सुब्हानी ! तुम हो क़ुत्ब-ए-रब्बानी या महबूब-ए-सुब्हानी ! तुम...