मैं सदक़े जाऊँ ग़ौस-ए-पाक / Main Sadqe Jaun Ghaus-e-Pak
मरहबा या ग़ौस-ए-आ'ज़म ! मरहबा या ग़ौस-ए-आ'ज़म ! मैं सदक़े जाऊँ, ग़ौस-ए-पाक ! मैं सदक़े जाऊँ, ग़ौस-ए-पाक ! मैं वारी जाऊँ, ग़ौस-ए-पाक ! मैं सदक़े जाऊँ, ग़ौस-ए-पाक ! तेरे दर से है मँगतों का गुज़ारा, या शह-ए-बग़दाद ! ये सुन कर मैं ने भी दामन पसारा, या शह-ए-बग़दाद ! मैं सदक़े जाऊँ, ग़ौस-ए-पाक ! मैं सदक़े जाऊँ, ग़ौस-ए-पाक ! मेरी क़िस्मत का चमका दो सितारा, या शह-ए-बग़दाद ! दिखा दो अपना चेहरा प्यारा प्यारा, या शह-ए-बग़दाद ! मैं सदक़े जाऊँ, ग़ौस-ए-पाक ! मैं सदक़े जाऊँ, ग़ौस-ए-पाक ! इजाज़त दो कि मैं बग़दाद हाज़िर हो के फिर कर लूँ तुम्हारे नीले गुंबद का नज़ारा, या शह-ए-बग़दाद ! मैं सदक़े जाऊँ, ग़ौस-ए-पाक ! मैं सदक़े जाऊँ, ग़ौस-ए-पाक ! करम मीराँ ! मेरे उजड़े गुलिस्ताँ में बहार आए ख़िज़ाँ का रुख़ फिरा दो अब ख़ुदा-रा, या शह-ए-बग़दाद ! मैं सदक़े जाऊँ, ग़ौस-ए-पाक ! मैं सदक़े जाऊँ, ग़ौस-ए-पाक ! अगरचे लाख पापी है, मगर 'अत्तार किस का है ? तुम्हारा है तुम्हारा है तुम्हारा, या शह-ए-बग़दाद ! मैं सदक़े जाऊँ, ग़ौस-ए-पाक ! मैं सदक़े जाऊँ, ग़ौस-ए-पाक ! शायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरी ना'त-ख़्वाँ: क़ारी ख़लील अत्त...