जहाँ आक़ा की मिदहत हो गई है / Jahan Aaqa Ki Midhat Ho Gai Hai
जहाँ आक़ा की मिदहत हो गई है जगह वो मिस्ल-ए-जन्नत हो गई है मुक़द्दर का सिकंदर है वो जिस को मदीने की ज़ियारत हो गई है मेरे आक़ा ने जो फ़रमा दिया है वो उम्मत की शरी'अत हो गई है ये तेरे दूध की 'अज़मत है, ज़हरा ! जो नेज़े पर तिलावत हो गई है 'अली के शाहज़ादे ! कर्बला में फ़िदा तुझ पर शहादत हो गई है नबी की ना'त की बरकत है ये सब मेरी दुनिया में शोहरत हो गई है इमाम अहमद रज़ा ख़ाँ की बदौलत 'अक़ीदे की तहारत हो गई है जो दीवाना है प्यारे मुस्तफ़ा का हयात ! उस पर 'इनायत हो गई है ना'त-ख़्वाँ: अक़ीलुर्रहमान मुरादाबादी jahaa.n aaqa ki mid.hat ho gai hai jagah wo misl-e-jannat ho gai hai muqaddar ka sikandar hai wo jis ko madine ki ziyaarat ho gai hai mere aaqa ne jo farma diya hai wo ummat ki sharee'at ho gai hai ye tere doodh ki 'azmat hai, zahra ! jo neze par tilaawat ho gai hai 'ali ke shaahzaade ! karbala me.n fida tujh par shahaadat ho gai hai nabi ki naa't ki barkat hai ye sab meri duniya me.n shohrat ho gai hai imaa...