अज सिक मित्तराँ दी वधेरी ए | सुब्हानल्लाह सुब्हानल्लाह / Aj Sik Mittran Di Wadheri Ae | Subhanallah Subhanallah
अज सिक मित्तराँ दी वधेरी ए क्यूँ दिलड़ी उदास घनेरी ए ? लूँ लूँ विच शौक़ चंगेरी ए अज नैनाँ लाइयाँ क्यूँ झड़ियाँ ? अत्तैफ़ु सरा मिन तल'अतिही व-श्शज़्वु बदा मिव्वफ़्रतिही फ़सकर्तु हुना मिन नज़्रतिही नैनाँ दियाँ फ़ौजाँ सर चढ़ियाँ मुख चँद बदर शा'शानी ए मथे चमके लाट नूरानी ए काली ज़ुल्फ़ ते अख मस्तानी ए मख़्मूर अक्खीं हिन मद भरियाँ दो अबरू क़ौस मिसाल दिसन जैं तों नोक-ए-मिज़ा दे तीर छुटन लब्बाँ सुर्ख़ आखाँ कि ला'ल-ए-यमन चिट्टे दंद मोती दियाँ हिन लड़ियाँ इस सूरत नूँ मैं जान आखाँ जानान कि जान-ए-जहान आखाँ सच आखाँ ते रब्ब दी शान आखाँ जिस शान तों शानाँ सब बनियाँ एहा सूरत है बे-सूरत थीं बे-सूरत ज़ाहिर सूरत थीं बे-रंग दिसे इस मूरत थीं विच वहदत फुट्टियाँ जद घड़ियाँ दस्से सूरत राह बे-सूरत दा तौबा राह की 'ऐन हक़ीक़त दा पर कम नहीं बे-सूझत दा कोई विरलियाँ मोती लै तरियाँ एहा सूरत शाला पेश-ए-नज़र रहे वक़्त-ए-नज़ा' ते रोज़-ए-हशर विच क़ब्र ते पुल थीं जद होसी गुज़र सब खोटियाँ थीसन तद खरियाँ यु'अतीका रब्बुका दास तुसाँ फ़तरदा थीं पूरी आस असाँ लजपाल करीसी पास असाँ वश्फ़...