तेरी ज़ात है अब्क़री ग़ौस-ए-आज़म / Teri Zaat Hai Abqari Ghaus-e-Azam
तेरी ज़ात है 'अब्क़री, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! मिली है तुझे सरवरी, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! तेरा बंदा दोज़ख़ की आतिश से, मौला ! बरी है बरी है बरी, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! ख़ुदा का करम है मैं बंदा हूँ तेरा हुआ जब से मैं क़ादरी, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! तेरा, तेरे बाबा का ज़िक्र-ए-मु'अत्तर यही है मेरी शा'इरी, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! कभी ख़्वाब में आ के जल्वा दिखाओ नज़र मुंतज़िर है मेरी, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! तेरे दर पे जाऊँ तो वापस न आऊँ मुयस्सर हो वो हाज़िरी, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! करूँ हर घड़ी तेरे नाना की ख़िदमत मुझे दे दे वो नौकरी, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! सँवर जाए मेरे मुक़द्दर की बिगड़ी नज़र डालो इक सरसरी, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! तू है 'अब्द-ए-क़ादिर, तेरा रब है क़ादिर ज़हे-बख़्त मैं क़ादरी, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! तेरे दुश्मनों पर ख़ुदा के ग़ज़ब की क़हर बन के बिजली गिरी, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! तू वो बंदा-परवर है फ़ज़्ल-ए-ख़ुदा से फ़िदा तुझ पे है परवरी, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! ज़माने के हालात तुझ पर 'अयाँ हैं सभी बातिनी ज़ाहिरी, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! हर इक शातिम-ए-मुस्तफ़ा को सज़ा दो यही 'अर्ज़ है आख़िरी, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! शहा ! अपने अय्यूब पर इक नज़र ह...