जो है ख़ुदा का इक वली | वो मेरा पीर अज़हरी / Jo Hai Khuda Ka Ek Wali | Wo Mera Peer Azhari
जो है ख़ुदा का इक वली, है सच्चा 'आशिक़-ए-नबी 'अता है ग़ौस-ए-पाक की, वो मेरा पीर अज़हरी वो मेरा पीर अज़हरी, वो मेरा पीर अज़हरी वो मेरा पीर अज़हरी, वो मेरा पीर अज़हरी दु'आ-ए-मुस्तफ़ा रज़ा, रज़ा-ए-मुस्तफ़ा रज़ा सदा-ए-मुस्तफ़ा रज़ा, 'अता-ए-मुस्तफ़ा रज़ा है उस पे हर जगह सदा निगाह-ए-मुस्तफ़ा रज़ा है ऐसी शान का धनी, वो मेरा पीर अज़हरी वो मेरा पीर अज़हरी, वो मेरा पीर अज़हरी वो मेरा पीर अज़हरी, वो मेरा पीर अज़हरी बुज़ुर्गों की दु'आएँ ले के हिन्द से वो जब चला पहुँच के मिस्र देखते ही देखते वो छा गया ये उस का 'इल्मी मर्तबा, था दंग सारा जामि'आ बना जो फ़ख़्र-ए-अज़हरी, वो मेरा पीर अज़हरी वो मेरा पीर अज़हरी, वो मेरा पीर अज़हरी वो मेरा पीर अज़हरी, वो मेरा पीर अज़हरी मचा के 'इल्म-ओ-फ़न की धूम मिस्र से वो आ गए ये उन की शान थी कि लेने मुस्तफ़ा रज़ा गए था इतना आप पर यक़ीं, बनाया अपना जा-नशीं उन्हीं को कहते हैं सभी, वो मेरा पीर अज़हरी वो मेरा पीर अज़हरी, वो मेरा पीर अज़हरी वो मेरा पीर अज़हरी, वो मेरा पीर अज़हरी ग़ुरूर-ए-दुश्मन-ए-नबी को तोड़ता चला गया सभी को मस्लक-ए-रज़ा से जोड़ता चला गया हर एक सु...