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बारहवीं का नूर दिल पे छा गया / Barahwin Ka Noor Dil Pe Chha Gaya | Barvi Ka Noor Dil Pe Cha Gaya (All Versions)

Barvi Ka Noor Dil Pe Cha Gaya Lyrics in Hindi, English & Urdu आ गए मुस्तफ़ा ! मरहबा मरहबा ! सरकार की आमद ! मरहबा ! दिलदार की आमद ! मरहबा ! मंठार की आमद ! मरहबा ! मुख़्तार की आमद ! मरहबा ! आक़ा की आमद ! मरहबा ! दाता की आमद ! मरहबा ! आ'ला की आमद ! मरहबा ! मौला की आमद ! मरहबा ! बारहवीं का नूर दिल पे छा गया आ गए नबी, आख़िरी नबी नूर से सजा 'अर्श-ए-किब्रिया आ गए नबी, आख़िरी नबी क्यूँ बारहवीं पे है सभी को प्यार आ गया आया इसी दिन अहमद-ए-मुख़्तार आ गया घर आमिना के सय्यिद-ए-अबरार आ गया ख़ुशियाँ मनाओ, ग़म-ज़दो ! ग़म-ख़्वार आ गया या ख़ुदा ! करम तेरा मोमिनों पे ये हुआ बख़्शवाने को ख़ता आ गए हैं मुस्तफ़ा 'आसियो ! सुनो, रहमत-ए-ख़ुदा आ गए नबी, आख़िरी नबी बारहवीं का नूर दिल पे छा गया आ गए नबी, आख़िरी नबी नूर से सजा 'अर्श-ए-किब्रिया आ गए नबी, आख़िरी नबी मुहम्मद-ए-मुस्तफ़ा ! सब से आख़िरी नबी ! अहमद-ए-मुज्तबा ! सब से आख़िरी नबी ! हैं शफ़ी'-उल-वरा ! सब से आख़िरी नबी ! आमिना का लाडला ! सब से आख़िरी नबी ! या रसूलल्लाह ! या हबीबल्लाह ! या रसूलल्लाह ! या हबीबल्लाह ! निसार तेरी ...

ज़मीं से फ़लक तक यही इक सदा है | मेरे मुस्तफ़ा हैं / Zameen Se Falak Tak Yahi Ik Sada Hai | Mere Mustafa Hain

Zameen Se Falak Tak Yahi Ek Sada Hai Mere Mustafa Hain Lyrics in Hindi, English & Urdu ज़मीं से फ़लक तक यही इक सदा है मेरे मुस्तफ़ा हैं, मेरे मुस्तफ़ा हैं सर उन के शफ़ा'अत का सेहरा सजा है मेरे मुस्तफ़ा हैं, मेरे मुस्तफ़ा हैं जो नबियों रसूलों के भी मुक़्तदा हैं जो मौला 'अली के भी मुश्किल-कुशा हैं उन्हीं से ज़माना ये रौशन हुआ है मेरे मुस्तफ़ा हैं, मेरे मुस्तफ़ा हैं जो उँगली से कर देते हैं चाँद टुकड़े जो चाहें तो डूबा हुआ शम्स पलटे ये ए'जाज़ उन को ख़ुदा ने दिया है मेरे मुस्तफ़ा हैं, मेरे मुस्तफ़ा हैं ज़मीं, 'अर्श, दरिया है सदक़ा नबी का समर, बाग़-ओ-सहरा है सदक़ा नबी का उन्हीं के ही सदक़े में सब कुछ बना है मेरे मुस्तफ़ा हैं, मेरे मुस्तफ़ा हैं जिधर देखिए रौशनी रौशनी है शह-ए-अंबिया की विलादत हुई है ज़रा देखिए का'बा भी झूमता है मेरे मुस्तफ़ा हैं, मेरे मुस्तफ़ा हैं जो 'आशिक़ है उन का वो डरता नहीं है और ईमान का सौदा करता नहीं है वो चढ़ कर के सूली पे भी बोलता है मेरे मुस्तफ़ा हैं, मेरे मुस्तफ़ा हैं सहाबा शह-ए-दीं के रौशन सितारे और आल-ए-नबी डूबतों के सहारे वो हक़ पर है इन ...

सजाओ घर गली कूचे मुहम्मद मुस्तफ़ा आए / Sajao Ghar Gali Kooche Muhammad Mustafa Aaye

Sajao Ghar Gali Kooche Muhammad Mustafa Aaye Lyrics in Hindi, English & Urdu मेरे सरकार आते हैं, मेरे सरकार आते हैं सजाओ घर गली कूचे, मुहम्मद मुस्तफ़ा आए खिली कलियाँ, खिले ग़ुंचे, मुहम्मद मुस्तफ़ा आए सजाओ घर गली कूचे, मुहम्मद मुस्तफ़ा आए मेरे आक़ा आ गए, मेरे दाता आ गए मेरे साइयाँ आ गए, प्यारे आक़ा आ गए ज़मीन-ओ-आसमाँ तक नूर फैला उन की आमद है आक़ा की आमद ! मरहबा ! मौला की आमद ! मरहबा ! ताहा की आमद ! मरहबा ! यासीं की आमद ! मरहबा ! ज़मीन-ओ-आसमाँ तक नूर फैला उन की आमद है कि रहमत के हुए साए, मुहम्मद मुस्तफ़ा आए सजाओ घर गली कूचे, मुहम्मद मुस्तफ़ा आए आमिना का ला'ल आया, आमिना का ला'ल आया आमिना का ला'ल आया, आमिना का ला'ल आया ग़ुलामों बा-अदब हो कर करो ज़िक्र-ए-नबी सारे कि ख़त्म-ए-मुर्सलाँ आए, मुहम्मद मुस्तफ़ा आए सजाओ घर गली कूचे, मुहम्मद मुस्तफ़ा आए मनाओ जश्न नादारो ! तुम्हारे ग़म-गुसार आए हुज़ूर आए, हुज़ूर आए, मुहम्मद मुस्तफ़ा आए सजाओ घर गली कूचे, मुहम्मद मुस्तफ़ा आए मेरे आक़ा आ गए, मेरे दाता आ गए मेरे साइयाँ आ गए, प्यारे आक़ा आ गए मलाइक क़ुदसियो ! तुम को बशारत हो, मुबारक ह...

जिधर देखिए रहमतों का है साया | हुज़ूर आ रहे हैं / Jidhar Dekhiye Rahmaton Ka Hai Saya | Huzoor Aa Rahe Hain

Huzoor Aa Rahe Hain Lyrics in Hindi & English मरहबा मरहबा, मरहबा या मुस्तफ़ा ! मरहबा मरहबा, मरहबा या मुस्तफ़ा ! उठा के परचम आक़ा का ना'रा लगाओ आक़ा का मरहबा मरहबा, या रसूलल्लाह ! हुज़ूर आ रहे हैं, हुज़ूर आ रहे हैं हुज़ूर आ रहे हैं, हुज़ूर आ रहे हैं जिधर देखिए रहमतों का है साया हुज़ूर आ रहे हैं, हुज़ूर आ रहे हैं है ख़ुशियों में डूबा हुआ कुल ज़माना हुज़ूर आ रहे हैं, हुज़ूर आ रहे हैं सरकार की आमद ! मरहबा ! दिलदार की आमद ! मरहबा ! मक्की की आमद ! मरहबा ! मदनी की आमद ! मरहबा ! यासीन की आमद ! मरहबा ! ताहा की आमद ! मरहबा ! हलीमा ! तुम्हारी ग़रीबी मिटाने तुम्हारा मकाँ रश्क-ए-जन्नत बनाने वो देखो मुक़द्दर जगाने तुम्हारा हुज़ूर आ रहे हैं, हुज़ूर आ रहे हैं हुज़ूर आ रहे हैं, हुज़ूर आ रहे हैं हुज़ूर आ रहे हैं, हुज़ूर आ रहे हैं ज़मीं सज गई है, फ़लक सज गया है हर इक लब पे सल्ले-'अला की सदा है लगाते हैं का'बे पे जिब्रील झंडा हुज़ूर आ रहे हैं, हुज़ूर आ रहे हैं हुज़ूर आ रहे हैं, हुज़ूर आ रहे हैं हुज़ूर आ रहे हैं, हुज़ूर आ रहे हैं उठा के परचम आक़ा का ना'रा लगाओ आक़ा का मरहबा मरहबा, या र...