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सुल्तान-ए-कर्बला को हमारा सलाम हो / Sultan-e-Karbala Ko Hamara Salam Ho

सुल्तान-ए-कर्बला को हमारा सलाम हो जानान-ए-मुस्तफ़ा को हमारा सलाम हो 'अब्बास नामदार हैं ज़ख़्मों से चूर चूर उस पैकर-ए-रिज़ा को हमारा सलाम हो अकबर से नौजवान भी रन में हुए शहीद हम-शक्ल-ए-मुस्तफ़ा को हमारा सलाम हो भाई, भतीजे, भानजे सब हो गए निसार हर ला'ल-ए-बे-बहा को हमारा सलाम हो असग़र की नन्हीं जान पे लाखों दुरूद हों मज़्लूम-ओ-बे-ख़ता को हमारा सलाम हो हो कर शहीद क़ौम की कश्ती तिरा गए उम्मत के नाख़ुदा को हमारा सलाम हो नासिर विला-ए-शाह में कहता है बार बार मेहमान-ए-कर्बला को हमारा सलाम हो ना'त-ख़्वाँ: मुहम्मद ओवैस रज़ा क़ादरी असद रज़ा अत्तारी सय्यिद हस्सानुल्लाह हुसैनी हाफ़िज़ ताहिर क़ादरी सय्यिदा अरीबा फ़ातिमा sultaan-e-karbala ko hamaara salaam ho jaanaan-e-mustafa ko hamaara salaam ho 'abbaas naamdaar hai.n zaKHmo.n se choor choor us paikar-e-riza ko hamaara salaam ho akbar se nau-jawaan bhi ran me.n hue shaheed ham shakl-e-mustafa ko hamaara salaam ho bhaai, bhateeje, bhaanaje sab ho gaye nisaar har laa'l-e-be-baha ko hamaara salaam ho asGar ki nan...

ये बिल-यक़ीं हुसैन है नबी का नूर-ए-ऐन है / Ye Bil Yaqeen Hussain Hai Nabi Ka Noor-e-Ain Hai

लिबास है फटा हुआ, ग़ुबार में अटा हुआ तमाम जिस्म-ए-नाज़नीं छिदा हुवा, कटा हुआ ये कौन ज़ी-वक़ार है ! बला का शह-सवार है ! कि है हज़ारों क़ातिलों के सामने डटा हुआ ये बिल-यक़ीं हुसैन है, नबी का नूर-ए-'ऐन है हुसैन ही हुसैन है, नबी का नूर-ए-'ऐन है ये कौन हक़-परस्त है, मय-ए-रज़ा-ए-मस्त है कि जिस के सामने कोई बुलंद है न पस्त है उधर हज़ार घात है, मगर 'अजीब बात है कि एक से हज़ार-हा का हौसला शिकस्त है ये बिल-यक़ीं हुसैन है, नबी का नूर-ए-'ऐन है हुसैन ही हुसैन है, नबी का नूर-ए-'ऐन है दिलावरी में फ़र्द है, बड़ा ही शेर-मर्द है कि जिस के दबदबे से रंग दुश्मनों का ज़र्द है हबीब-ए-मुस्तफ़ा है ये, मुजाहिद-ए-ख़ुदा है ये जभी तो इस के सामने ये फ़ौज गर्द-बर्द है ये बिल-यक़ीं हुसैन है, नबी का नूर-ए-'ऐन है हुसैन ही हुसैन है, नबी का नूर-ए-'ऐन है उधर सिपाह-ए-शाम है, हज़ार इंतिज़ाम है उधर हैं दुश्मनान-ए-दीं, इधर फ़क़त इमाम है मगर 'अजीब शान है, ग़ज़ब की आन-बान है कि जिस तरफ़ उठी है तेग़ बस ख़ुदा का नाम है ये बिल-यक़ीं हुसैन है, नबी का नूर-ए-'ऐन है हुसैन ही हुसैन है, नबी का नूर-ए-'ऐ...

सय्यिद ने कर्बला में वादे निभा दिए हैं / Syed Ne Karbala Mein Wade Nibha Diye Hain

सय्यिद ने कर्बला में वा'दे निभा दिए हैं दीन-ए-मुहम्मदी के गुलशन खिला दिए हैं बोले हुसैन, मौला ! तेरी रिज़ा की ख़ातिर इक एक कर के मैं ने हीरे लुटा दिए हैं दीन-ए-नबी पे वारी अकबर ने भी जवानी 'अब्बास ने भी अपने बाज़ू कटा दिए हैं ज़ैनब के बाग़ में भी दो फूल थे महकते ज़ैनब ने वो भी दोनों राह-ए-ख़ुदा दिए हैं ज़हरा के नाज़-पाले, फूलों पे सोने वाले कर्बल की ख़ाक पर वो हीरे लुटा दिए हैं सरकार होंगे राज़ी उस से भी सुन लो, हाफ़िज़ ! दो-चार आँसू रो कर जिस ने बहा दिए हैं ना'त-ख़्वाँ: प्रोफ़ेसर अब्दुर्रउफ़ रूफ़ी असद रज़ा अत्तारी हाफ़िज़ अहसन क़ादरी sayyid ne karbala me.n waa'de nibha diye hai.n deen-e-muhammadi ke gulshan khila diye hai.n bole husain, maula ! teri riza ki KHaatir ik ek kar ke mai.n ne heere luTa diye hai.n deen-e-nabi pe waari akbar ne bhi jawaani 'abbaas ne bhi apne baazu kaTa diye hai.n zainab ke baaG me.n bhi do phool the mahakte zainab ne wo bhi dono.n raah-e-KHuda diye hai.n zahra ke naaz-paale, phoolo.n pe sone waale karbal ki KHaak par...

हैं जान-ओ-दिल ये हमारे तुम्हारे नाम हुसैन | तुम्हें सलाम हुसैन / Hain Jaan-o-Dil Ye Hamare Tumhare Naam Hussain | Tumhein Salam Hussain

या हुसैन, या हुसैन ! या हुसैन, या हुसैन ! या हुसैन, तुम्हें सलाम, हुसैन ! हैं जान-ओ-दिल ये हमारे तुम्हारे नाम, हुसैन ! हमारे दिल पे रक़म हैं तुम्हारे नाम, हुसैन ! या हुसैन, या हुसैन ! या हुसैन, या हुसैन ! या हुसैन, तुम्हें सलाम, हुसैन ! अस्सलाम अस्सलाम अस्सलाम, या हुसैन ! अस्सलाम अस्सलाम अस्सलाम, या हुसैन ! तुम्हारा सानी कहाँ इब्न-ए-फ़ातिमा ज़हरा ! क़रार-ए-'इश्क़-ओ-वफ़ा तुम पे है तमाम, हुसैन ! या हुसैन, या हुसैन ! या हुसैन, या हुसैन ! या हुसैन, तुम्हें सलाम, हुसैन ! लुटा के घर को बचाया था तू ने दीन-ए-ख़ुदा ज़माना भूलेगा कैसे तेरा क़याम, हुसैन ! या हुसैन, या हुसैन ! या हुसैन, या हुसैन ! या हुसैन, तुम्हें सलाम, हुसैन ! अस्सलाम अस्सलाम अस्सलाम, या हुसैन ! अस्सलाम अस्सलाम अस्सलाम, या हुसैन ! शाह अस्त हुसैन, बादशाह अस्त हुसैन दीं अस्त हुसैन, दीं पनाह अस्त हुसैन सर दाद न दाद दस्त दर दस्त-ए-यज़ीद हक़्क़ा कि बिना ला-इलाह अस्त हुसैन यज़ीद-ए-वक़्त के हाथों में हाथ दे न कोई यही है शौकत-ए-मोमिन, यही पयाम-ए-हुसैन या हुसैन, या हुसैन ! या हुसैन, या हुसैन ! या हुसैन, तुम्हें सलाम,...

कर्बला के जाँ-निसारों को सलाम / Karbala Ke Jaan Nisaron Ko Salam

कर्बला के जाँ-निसारों को सलाम फ़ातिमा ज़हरा के प्यारों को सलाम मुस्तफ़ा के माह-पारों को सलाम नौजवानों गुल-'इज़ारों को सलाम कर्बला तेरी बहारों को सलाम जाँ-निसारी के नज़ारों को सलाम या हुसैन इब्न-ए-'अली मुश्किल-कुशा ! आप के सब जाँ-निसारों को सलाम अकबर-ओ-असग़र पे जाँ क़ुर्बान हो मेरे दिल के ताजदारों को सलाम क़ासिम-ओ-'अब्बास पर हों रहमतें कर्बला के शह-सुवारों को सलाम जिस किसी ने कर्बला में जान दी उन सभी ईमानदारों को सलाम भूकी प्यासी बीबियों पर रहमतें भूके प्यासे गुल-'इज़ारों को सलाम भेद क्या जाने शहादत का कोई उन ख़ुदा के राज़दारों को सलाम बेबसी में भी हया बाक़ी रही सब हुसैनी पर्दा-दारों को सलाम रहमतें हों हर सहाबी पर मुदाम और ख़ुसूसन चार यारों को सलाम बीबियों को, 'आबिद-ए-बीमार को बेकसों को, ग़म के मारों को सलाम हो गए क़ुर्बां मुहम्मद और 'औन सय्यिदा ज़ैनब के प्यारों को सलाम कर्बला में ज़ुल्म के टूटे पहाड़ जिन पे उन सब दिल-फ़िगारों को सलाम आल-ओ-असहाब-ए-नबी के जिस क़दर चाहने वाले हैं सारों को सलाम या ख़ुदा ! ऐ काश, जा कर फिर करूँ कर्बला के सब मज़ारों को सलाम ...

बातिल के सामने जो न हारा हुसैन है / Batil Ke Samne Jo Na Hara Hussain Hai

बातिल के सामने जो न हारा हुसैन है उम्मत का जिस ने बख़्त सँवारा हुसैन है दीन-ए-नबी का 'अर्श पे तारा हुसैन है सर दे के जिस ने दीन सँवारा हुसैन है मौला हुसैन है, मौला हुसैन है मौला हुसैन है, मौला हुसैन है सज्दे में सर झुका के, सच्चे रसूल-ज़ादे ! दुनिया बदल दी तुम ने, ऐ हक़ के शाहज़ादे ! इस्लाम की रगों में ख़ूँ दान कर दिया है दीन-ए-नबी का 'अर्श पे तारा हुसैन है सर दे के जिस ने दीन सँवारा हुसैन है मौला हुसैन है, मौला हुसैन है मौला हुसैन है, मौला हुसैन है आए हैं कर्बला में हुसैन इब्न-ए-हैदर बने हैं ये जहाँ के मौला हुसैन रहबर नेज़े पे जिस ने देखो क़ुरआन पढ़ दिया है मौला हुसैन है, मौला हुसैन है मौला हुसैन है, मौला हुसैन है हैदर का लाडला है, ज़हरा का है वो जाया कंधे पे मुस्तफ़ा ने मौला को है बिठाया रुत्बा है जिन का रब ने कौनैन में बढ़ाया मौला हुसैन है, मौला हुसैन है मौला हुसैन है, मौला हुसैन है मिदहत लिखी है तुम ने, अहमद ! जो शाह-ए-दीं की ख़ुश्बू महक उठी है अफ़लाक और ज़मीं की मौला ने देखो तुम पर फ़ैज़ान कर दिया है मौला हुसैन है, मौला हुसैन है मौला हुसैन है, मौला हुसैन है श...

हमारे क़ाइद-ओ-रहबर हुसैन ज़िंदा हैं / Hamare Qaid-o-Rahbar Hussain Zinda Hain

हमारे क़ाइद-ओ-रहबर हुसैन ज़िंदा हैं रसूल-ए-पाक के मज़हर हुसैन ज़िंदा हैं नबी के दीन की ख़ातिर शहीद हो कर भी हर एक सुन्नी के अंदर हुसैन ज़िंदा हैं डरे वो जिन का जहाँ में नहीं कोई हामी हुसैनियों को हो क्यूँ डर, हुसैन ज़िंदा हैं तुम्हारा तख़्त-ए-हुकूमत अभी पलट देंगे यज़ीदियो ! न करो शर, हुसैन ज़िंदा हैं जिनाँ में क़ासिम-ओ-'अब्बास सैर करते हैं वहीं पे अकबर-ओ-असग़र, हुसैन ज़िंदा हैं शहीदों को कभी मुर्दा गुमान न करना ख़ुदा भी कहता है यकसर हुसैन ज़िंदा हैं उन्हें जो मुर्दा समझते हैं वो करे मातम मेरा 'अक़ीदा है दिलबर हुसैन ज़िंदा हैं लगाया ग़ौस-ओ-रज़ा, ख़्वाजा ने यही ना'रा हमारे मौला-ओ-सरवर हुसैन ज़िंदा हैं अभी तो बाक़ी है कर्बल का आख़िरी मैदाँ बता दो कुफ़्र को जा कर हुसैन ज़िंदा हैं यज़ीद-ए-वक़्त का दिल काँप जाए दहशत से ऐ सुन्नियो ! कहो मिल कर, हुसैन ज़िंदा हैं ज़मीन-ए-कर्ब-ओ-बला कह रही है क्या तुझ से सुन, ऐ यज़ीद के लश्कर ! हुसैन ज़िंदा हैं इसी से जान लो है कौन फ़ातेह-ए-कर्बल यज़ीद मर गया है पर हुसैन ज़िंदा हैं मता'-ए-'इश्क़ की ख़ैरात माँग लो, अय्यूब ! सरापा 'इश्क़ के पैकर हुसै...

शाह-ए-कर्ब-ओ-बला ले लो ले लो सलाम अब हमारा / Shah-e-Karb-o-bala Lelo Lelo Salam Ab Hamara

या हुसैन अस्सलाम ! या हुसैन अस्सलाम ! या हुसैन अस्सलाम ! या हुसैन अस्सलाम ! शाह-ए-कर्ब-ओ-बला ! ले लो ले लो सलाम अब हमारा इब्न-ए-मुश्किल-कुशा ! ले लो ले लो सलाम अब हमारा मौला 'अली के हो नूर-ए-नज़र और फ़ातिमा के हो लख़्त-ए-जिगर सिब्त-ए-ख़ैर-उल-वरा ! ले लो ले लो सलाम अब हमारा शाह-ए-कर्ब-ओ-बला ! ले लो ले लो सलाम अब हमारा इब्न-ए-मुश्किल-कुशा ! ले लो ले लो सलाम अब हमारा भाई, भतीजे, भांजे भी सब हो गए निसार हर ला'ल-ए-बे-बहा को हमारा सलाम हो असग़र की नन्हीं जान पे लाखों दुरूद हों मज़्लूम-ओ-बे-ख़ता को हमारा सलाम हो क़ुर्बां किया सारे घर-बार को, राज़ी किया रब्ब-ए-ग़फ़्फ़ार को शान-ए-सब्र-ओ-रज़ा ! ले लो ले लो सलाम अब हमारा शाह-ए-कर्ब-ओ-बला ! ले लो ले लो सलाम अब हमारा इब्न-ए-मुश्किल-कुशा ! ले लो ले लो सलाम अब हमारा 'अब्बास-ए-नामदार हैं ज़ख़्मों से चूर चूर उस पैकर-ए-रिज़ा को हमारा सलाम हो अकबर से नौजवान भी रन में हुए शहीद हम-शक्ल-ए-मुस्तफ़ा को हमारा सलाम हो हैराँ किया बच्चों की प्यास ने, बाज़ू कटा डाले 'अब्बास ने दरिया कहने लगा, ले लो ले लो सलाम अब हमारा शाह-ए-कर्ब-ओ-बला ! ले लो ...

शुजाअत नाज़ करती है जलालत नाज़ करती है / Shujaat Naaz Karti Hai Jalalat Naaz Karti Hai

शुजा'अत नाज़ करती है, जलालत नाज़ करती है वो सुल्तान-ए-ज़माँ हैं, उन पे शौकत नाज़ करती है सदाक़त नाज़ करती है, अमानत नाज़ करती है हमिय्यत नाज़ करती है, मुरव्वत नाज़ करती है शह-ए-ख़ूबाँ पे हर ख़ूबी-ओ-ख़स्लत नाज़ करती है करीम ऐसे हैं वो उन पर करामत नाज़ करती है जहान-ए-हुस्न में भी कुछ निराली शान है उन की नबी के गुल पे गुलज़ारों की ज़ीनत नाज़ करती है शहंशाह-ए-शहीदाँ हो, अनोखी शान वाले हो हुसैन इब्न-ए-'अली ! तुम पर शहादत नाज़ करती है बिठा कर शाना-ए-अक़दस पे कर दी शान दो-बाला नबी के लाडलों पर हर फ़ज़ीलत नाज़ करती है ज़बीन-ए-नाज़ उन की जल्वा-गाह-ए-हुस्न है किस की रुख़-ए-ज़ेबा पे हज़रत की मलाहत नाज़ करती है निगाह-ए-नाज़ से नक़्शा बदल देते हैं 'आलम का अदा-ए-सरवर-ए-ख़ूबाँ पे नुदरत नाज़ करती है फ़िदाई हूँ तो किस का हूँ, कोई देखे मेरी क़िस्मत क़दम पर जिस हसीं की जान-ए-तल'अत नाज़ करती है ख़ुदा के फ़ज़्ल से, अख़्तर ! मैं उन का नाम-लेवा हूँ मैं हूँ क़िस्मत पे नाज़ाँ, मुझ पे क़िस्मत नाज़ करती है शायर: मुफ़्ती अख़्तर रज़ा ख़ान ना'त-ख़्वाँ: साबिर रज़ा अज़हरी सुरत सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वी वासिफ़ रज़ा नूरी...

मेरे हुसैन तुझे सलाम | अस्सलाम या हुसैन / Mere Hussain Tujhe Salaam | Assalam Ya Hussain

मेरे हुसैन ! तुझे सलाम, मेरे हुसैन ! तुझे सलाम अस्सलाम या हुसैन ! अस्सलाम या हुसैन ! अस्सलाम या हुसैन ! अस्सलाम या हुसैन ! कर लिया नोश जिस ने शहादत का जाम उस हुसैन इब्न-ए-हैदर पे लाखों सलाम कहो हुसैन पर सलाम, कहो हुसैन पर सलाम मेरे हुसैन ! तुझे सलाम, मेरे हुसैन ! तुझे सलाम अस्सलाम या हुसैन ! अस्सलाम या हुसैन ! अस्सलाम या हुसैन ! अस्सलाम या हुसैन ! जिस को धोके से कूफ़े बुलाया गया और बुला कर के ना-हक़ सताया गया जिस के बच्चों को प्यासा रुलाया गया जिस की गर्दन पे ख़ंजर चलाया गया उस हुसैन इब्न-ए-हैदर पे लाखों सलाम कहो हुसैन पर सलाम, कहो हुसैन पर सलाम मेरे हुसैन ! तुझे सलाम, मेरे हुसैन ! तुझे सलाम अस्सलाम या हुसैन ! अस्सलाम या हुसैन ! अस्सलाम या हुसैन ! अस्सलाम या हुसैन ! जिस का झूला फ़रिश्ते झुलाते रहे लोरियाँ दे के नूरी सुलाते रहे जिस को कांधों पे आक़ा बिठाते रहे उस पे सफ़्फ़ाक ख़ंजर चलाते रहे उस हुसैन इब्न-ए-हैदर पे लाखों सलाम कहो हुसैन पर सलाम, कहो हुसैन पर सलाम मेरे हुसैन ! तुझे सलाम, मेरे हुसैन ! तुझे सलाम अस्सलाम या हुसैन ! अस्सलाम या हुसैन ! अस्सलाम या हुसैन ! अस्स...

पंजतन की ज़रा छेड़िए गुफ़्तुगू / Panjtan Ki Zara Chhediye Guftugu

पंजतन की ज़रा छेड़िए गुफ़्तुगू नूरी चादर का क़िस्सा सुना दीजिए सर से पा तक जो सब नूर ही नूर हैं उन के पैकर का क़िस्सा सुना दीजिए जिस में महव-ए-'इबादत रहीं फ़ातिमा बे-इजाज़त न जिब्रील आए जहाँ जिस में पैदा हुए हैं हुसैन-ओ-हसन हम को उस घर का क़िस्सा सुना दीजिए जिन की हिम्मत पे दुनिया भी हैरान है जिन का शाहिद वो कर्बल का मैदान है दे गए हैं जो इस्लाम को ज़िंदगी उन बहत्तर का क़िस्सा सुना दीजिए अल्लाह अल्लाह ! बच्चा वो छे माह का क्या सितम है, न उस को भी बख़्शा गया जिस की आँखों में आँसू न आए कभी उस को असग़र का क़िस्सा सुना दीजिए कैसी बिजली निकलती थी तलवार से कैसे उड़ते थे सर उन के इक वार से कैसे थर्रा रहा था वो कर्ब-ओ-बला ज़र्ब-ए-अकबर का क़िस्सा सुना दीजिए ख़ून 'औन-ओ-मुहम्मद का कैसे बहा कैसे क़ासिम को मक़्तल से लाया गया कैसे बेटों की लाशें उठाते रहे इब्न-ए-हैदर का क़िस्सा सुना दीजिए सारी दुनिया में जिन का बड़ा शोर है जिन को ताक़त का, अज़हर ! बड़ा ज़ोर है बद्र का उन को नक़्शा दिखा दीजिए जंग-ए-ख़ैबर का क़िस्सा सुना दीजिए शायर: मौलाना अज़हर फ़ारूक़ी बरेलवी ना'त-ख़्वाँ: मुहम्मद अली फ़...

तक़दीर से मिली है मोहब्बत हुसैन की / Taqdeer Se Mili Hai Mohabbat Hussain Ki

तक़दीर से मिली है मोहब्बत हुसैन की जन्नत में ले के जाएगी उल्फ़त हुसैन की रब्ब-ए-हुसैन ! वासिता प्यारे हुसैन का फ़िरदौस में 'अता हो रफ़ाक़त हुसैन की माँ फ़ातिमा तो वालिद-ए-माजिद हैं मुर्तज़ा नाना नबी हैं, ख़ूब है क़िस्मत हुसैन की शेर-ए-ख़ुदा के शेर हैं, बेहद दिलेर हैं मशहूर है जहाँ में शुजा'अत हुसैन की कुंबा लुटाया, जान भी अपनी निसार की बे-मिस्ल-ओ-बे-मिसाल शहादत हुसैन की तख़्त-ए-यज़ीद ख़ाक में मिल कर फ़ना हुआ है आज भी दिलों पे हुकूमत हुसैन की दिल में रचा ले 'इश्क़ तू ज़हरा के लाल का महशर में रंग लाएगी चाहत हुसैन की मौला 'अली के लाल का अदना ग़ुलाम हूँ निस्बत रहे, 'इलाही ! सलामत हुसैन की बू-बक्र और 'उमर के तुफ़ैल, ऐ ख़ुदा-ए-पाक ! मरने से पहले देख लू तुर्बत हुसैन की महरूम कैसे हो भला मँगता हुसैन का ख़ाली फिराना है नहीं 'आदत हुसैन की भर भर के झोलियाँ लिए जाते हैं सब गदा मशहूर है जहाँ में सख़ावत हुसैन की 'अत्तार की ये आरज़ू पूरी हो, या ख़ुदा ! इस को दिखा दे ख़्वाब में सूरत हुसैन की शायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरी ना'त-ख़्वाँ: हस्सान अत्तारी मदनी रज़ा...