वाह क्या जूद-ओ-करम है शह-ए-बतहा तेरा / Wah Kya Jood-o-Karam Hai Shah-e-Batha Tera
वाह क्या जूद-ओ-करम है, शह-ए-बतहा ! तेरा नहीं सुनता ही नहीं माँगने वाला तेरा धारे चलते हैं 'अता के वो है क़तरा तेरा तारे खिलते हैं सख़ा के वो है ज़र्रा तेरा फ़ैज़ है, या शह-ए-तसनीम ! निराला तेरा आप प्यासों के तजस्सुस में है दरिया तेरा अग़्निया पलते हैं दर से वो है बाड़ा तेरा अस्फ़िया चलते हैं सर से वो है रस्ता तेरा फ़र्श वाले तेरी शौकत का 'उलू क्या जानें ख़ुसरवा ! 'अर्श पे उड़ता है फरेरा तेरा आस्माँ ख़्वान, ज़मीं ख़्वान, ज़माना मेहमान साहिब-ए-ख़ाना लक़ब किस का है तेरा तेरा मैं तो मालिक ही कहूँगा कि हो मालिक के हबीब या'नी महबूब-ओ-मुहिब में नहीं मेरा तेरा तेरे क़दमों में जो हैं ग़ैर का मुँह क्या देखें कौन नज़रों पे चढ़े देख के तल्वा तेरा बहर-ए-साइल का हूँ साइल न कुँएँ का प्यासा ख़ुद बुझा जाए कलेजा मेरा छींटा तेरा चोर हाकिम से छुपा करते हैं याँ इस के ख़िलाफ़ तेरे दामन में छुपे चोर अनोखा तेरा आँखें ठंडी हों, जिगर ताज़े हों, जानें सैराब सच्चे सूरज वो दिल-आरा है उजाला तेरा दिल 'अबस ख़ौफ़ से पत्ता-सा उड़ा जाता है पल्ला हलका सही भारी है भरोसा तेरा एक मैं क्या मेरे 'इस्या...