काबे पे पड़ी पहली नज़र तुम को मुबारक / Kabe Pe Padi Pehli Nazar Tum Ko Mubarak
का'बे पे पड़ी पहली नज़र तुम को मुबारक ऐ हाजियो ! ये हज का सफ़र तुम को मुबारक मुज़दल्फ़ा है, 'अर्फ़ात है, मर्वा है, सफ़ा है ये पाक ये पाकीज़ा नगर तुम को मुबारक ऐ हाजियो ! ये हज का सफ़र तुम को मुबारक का'बे पे पड़ी पहली नज़र तुम को मुबारक ऐ हाजियो ! ये हज का सफ़र तुम को मुबारक अब और तलब क्या है तेरी ज़ाइर-ए-का'बा है फ़र्श-ए-हरम पर तेरा सर, तुम को मुबारक ऐ हाजियो ! ये हज का सफ़र तुम को मुबारक का'बे पे पड़ी पहली नज़र तुम को मुबारक ऐ हाजियो ! ये हज का सफ़र तुम को मुबारक हैं ख़ाक-ए-मदीना के तेरे हाथ में ज़र्रे ये लाल, ये हीरे, ये गुहर तुम को मुबारक ऐ हाजियो ! ये हज का सफ़र तुम को मुबारक का'बे पे पड़ी पहली नज़र तुम को मुबारक ऐ हाजियो ! ये हज का सफ़र तुम को मुबारक तुम मस्जिद-ए-नबवी के अहाते में खड़े हो ये नूरियों की राह-गुज़र तुम को मुबारक ऐ हाजियो ! ये हज का सफ़र तुम को मुबारक का'बे पे पड़ी पहली नज़र तुम को मुबारक ऐ हाजियो ! ये हज का सफ़र तुम को मुबारक फ़ारूक़ी ! सभी हाजियों से कहते हैं क़ुदसी सज्दों के लिए रब का ये घर तुम को मुबारक ऐ हाजियो ! ये हज का सफ़र तुम को मुबारक क...