ऐ मेरे ख़ालिक़ ये इल्तिजा है मुझे भी अपना तू घर दिखा दे / Aye Mere Khaliq Ye Iltija Hai Mujhe Bhi Apna Tu Ghar Dikha De
झुका के सर यही सज्दों में माँगता हूँ दु'आ कि तेरे घर की ज़ियारत का शरफ़ मिल जाए ऐ मेरे ख़ालिक़ ! ये इल्तिजा है, मुझे भी अपना तू घर दिखा दे फ़रीज़ा हज का अदा करूँ मैं, कि हज पे मौला ! मुझे बुला ले ऐ मेरे ख़ालिक़ ! ये इल्तिजा है, मुझे भी अपना तू घर दिखा दे मैं ख़ाना-का'बा के गिर्द घूमूँ, ग़िलाफ़-ए-का'बा को मैं भी चूमूँ मैं तिश्ना-लब हूँ सबील-ए-ज़मज़म, ऐ मेरे मालिक ! मुझे पिला दे ऐ मेरे ख़ालिक़ ! ये इल्तिजा है, मुझे भी अपना तू घर दिखा दे बहुत ही 'आसी हूँ मानता हूँ, तेरी करीमी भी जानता हूँ कि अपने रहम-ओ-करम के सदक़े तू मेरे सारे गुनाह मिटा दे ऐ मेरे ख़ालिक़ ! ये इल्तिजा है, मुझे भी अपना तू घर दिखा दे सफ़ा-ओ-मरवा के दरमियाँ जो, चली थी बीबी जहाँ जहाँ जो मैं हाजरा की 'अज़ीम सुन्नत अदा करूँगा, तू हौसला दे ऐ मेरे ख़ालिक़ ! ये इल्तिजा है, मुझे भी अपना तू घर दिखा दे फ़रीज़ा क़ुर्बानी का अदा हो, कि जिस में शामिल तेरी रज़ा हो मैं चाहता हूँ, ऐ मेरे मौला ! तू जैसा चाहे मुझे बना दे ऐ मेरे ख़ालिक़ ! ये इल्तिजा है, मुझे भी अपना तू घर दिखा दे महीना हज का जो आ रहा है, स'ईद 'आक़िल की इल्त...