नूर का समाँ छाया उर्स-ए-अज़हरी आया / Noor Ka Saman Chhaya Urs-e-Azhari Aaya
नूर का समाँ छाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया फ़ैज़-ए-मुस्तफ़ा लाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया ज़िक्र-ओ-फ़िक्र-ए-दुनिया से हट के हुस्न-ए-अख़्तर ने दिल में जल्वा फ़रमाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया मुद्दतों से थे बेचैन, रज़वियों के दोनों नैन इंतिज़ार रंग लाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया हासिदों के सीने पे देखिए गिरी बिजली क़ल्ब-ए-सुन्नी मुस्काया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया फ़ज़्ल-ए-मुस्तफ़ा से वो का'बे के बने मेहमाँ वाह क्या शरफ़ पाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया देख कर, ऐ दीवानो ! हुस्न-ए-रू-ए-अख़्तर को चाँद भी है शरमाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया वाह वाह ! ज़रा देखो हल्क़ा ज़िक्र-ए-अख़्तर का किस-क़दर है गरमाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया दस्त-ए-शाह-ए-अस्जद से जाम-ए-अज़हरी पीजे कासा फिर से छलकाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया ग़ौल-ए-सुल्ह-ए-कुल्ली में ज़लज़ला किया बरपा नज्द जिन से लरज़ाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया साल भर से पर्दे में था समाँ ये नूरानी रुख़ से पर्दा सरकाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया सुन्नियो ! चले आओ साया-ए-बरेली में अब्र-ए-नूर बरसाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया 'उर्स-ए-फ़ख़्र-ए-अज़हर की बरकतें हैं ये, अय्यूब ! मेरा क़ल्ब चम...