वो मेरा ग़नी मेरा ग़नी मेरा ग़नी है / Wo Mera Ghani Mera Ghani Mera Ghani Hai
बा-वफ़ा बा-हया, आ'ला-ओ-'आली-सफ़ा मेरा 'उस्मान वो जिस के वसीले से हर इक बात बनी है वो मेरा ग़नी, मेरा ग़नी, मेरा ग़नी है वो मेरा ग़नी, मेरा ग़नी, मेरा ग़नी है मेरा मुर्शिद, मेरा मौला, मेरा सुल्तान है 'उस्मान मेरा दाता, मेरा आक़ा , मेरी पहचान है 'उस्मान सख़ियों का सख़ी है, 'उस्मान-ए-ग़नी है सख़ियों का सख़ी है, 'उस्मान-ए-ग़नी है जो जामे'-ए-क़ुरआन है, है 'आमिल-ए-सुन्नत ता-'उम्र दिया जिस ने हमें दर्स-ए-शरी'अत वो जिस से कली दीन के गुलशन की खिली है वो मेरा ग़नी, मेरा ग़नी, मेरा ग़नी है जो फ़ख़्र-ए-अबू-बक्र है, दामाद-ए-नबी है लौ जिस से 'उमर और 'अली की भी लगी है उस सा न ज़माने में कोई आया सख़ी है वो मेरा ग़नी, मेरा ग़नी, मेरा ग़नी है 'उस्मान का दुश्मन तो नबी का भी है दुश्मन दुश्मन है ख़ुदा का, वो 'अली का भी है दुश्मन दोज़ख़ का वो हक़दार है, हक़ बात यही है वो मेरा ग़नी, मेरा ग़नी, मेरा ग़नी है हो कैसे बयाँ हज़रत-ए-'उस्मान की 'अज़मत क़ुरआन को पढ़ते हुए पाई है शहादत वो जिस की जबीं आगे न दुश्मन के झुकी है वो मेरा ग़नी, मेरा ग़नी, मेरा ग़नी है हम अ...