करम हो करम ताजदार-ए-मदीना / Karam Ho Karam Tajdar-e-Madina
ऐ गुंबद-ए-ख़ज़रा के मकीं ! मेरी मदद कर या फिर ये बता कौन मेरा तेरे सिवा है करम हो करम, ताजदार-ए-मदीना ! करम चाहते हैं करम के भिकारी शहंशाह-ए-कौनैन तयबा के वाली ! मैं क़ुर्बान तुम पर, मेरी जान वारी हबीब-ए-ख़ुदा साक़ी-ए-हौज़-ए-कौसर ! ख़ुदारा ग़ुलामों पे चश्म-ए-करम हो हमें आज दे दो नवासों का सदक़ा कि मुद्दत से ख़ाली है झोली हमारी मेरा दिल भी लब्बैक बोले किसी दिन कभी सब्ज़ गुंबद को देखूँ मैं जा कर मुझे अपने रौज़े पे बुलवा लो, आक़ा ! हैं सारे जहाँ पर निगाहें तुम्हारी मुक़द्दर जो जागे तो इस तरह जागे मदीने मैं जाऊँ तो इस तरह जाऊँ दुरूदों की सौग़ात हो पास मेरे मुहम्मद मुहम्मद लबों पर हो जारी है क़ुरआन सारी किताबों से अफ़ज़ल ख़लिश ने पढ़ा है ये क़ुरआँ में, आक़ा ! सजाया गया सिदरतुल-मुंतहा को फ़लक पर जो पहुँची सवारी तुम्हारी ना'त-ख़्वाँ: असद रज़ा अत्तारी ai gumbad-e-KHazra ke makee.n ! meri madad kar ya phir ye bata kaun mera tere siwa hai karam ho karam, taajdaar-e-madina ! karam chaahte hai.n karam ke bhikaari shahenshaah-e-kaunain tayba ke waali ! mai.n qurbaan t...