बनाया मुझ को अपना है तेरा एहसान है मुर्शिद / Banaya Mujh Ko Apna Hai Tera Ehsan Hai Murshid
बनाया मुझ को अपना है, तेरा एहसान है मुर्शिद ! मिला मुझ को ये रुत्बा है, तेरा एहसान है मुर्शिद ! तेरी निस्बत ने मुझ को कर दिया है क्या से क्या, मुर्शिद ! रखा क्या मुझ में वर्ना है, तेरा एहसान है मुर्शिद ! भटकता फिर रहा था दश्त-ए-'इस्याँ में यूँही बेकस दिखाया तू ने रस्ता है, तेरा एहसान है मुर्शिद ! ये फ़ैशन का था शैदाई, यूँही फिरता था नंगे सर ये जो सर पर 'अमामा है, तेरा एहसान है मुर्शिद ! ज़बाँ पर गालियाँ, होंटों पे गाने थे कभी जारी ये जो लब पर मदीना है, तेरा एहसान है मुर्शिद ! ये निगराँ है, ये हाफ़िज़ है, ये क़ारी, ये मुबल्लिग़ है सभी पे तेरा साया है, तेरा एहसान है मुर्शिद ! नमाज़ों की हिफ़ाज़त का, 'इबादत का, तिलावत का मिला जो भी ये जज़्बा है, तेरा एहसान है मुर्शिद ! ये मदनी क़ाफ़िलों का, मदनी इन'आमात का तू ने दिया उम्मत को तोहफ़ा है, तेरा एहसान है मुर्शिद ! हया की चादर-ए-ने'मत 'अता कर दी उसे तू ने ये करती अब जो पर्दा है, तेरा एहसान है मुर्शिद ! ये हाए क्या मैं करता हूँ, तुझे नाराज़ करता हूँ मुझे फिर भी निभाया है, तेरा एहसान है मुर्शिद ! मैं हूँ मँगता तेरा...