शह-ए-दीं के नालैन उठाने के क़ाबिल / Shah-e-Deen Ke Nalain Uthane Ke Qabil
शह-ए-दीं के ना'लैन उठाने के क़ाबिल कहाँ मेरा सर उस ख़ज़ाने के क़ाबिल वो ख़ाक-ए-दयार-ए-हबीब-ए-ख़ुदा है कहाँ मेरी आँखें लगाने के क़ाबिल अभी वो बुला लें मुझे एक पल में मगर मैं कहाँ हूँ बुलाने के क़ाबिल ख़ुदा की क़सम वो बुलाएँगे मुझ को मैं हो जाऊँगा जब बुलाने के क़ाबिल मेरा ज़िक्र छोड़ो, तसव्वुर भी मेरा नहीं है मदीने में जाने के क़ाबिल अगर अपने आ'माल को याद कर लूँ नहीं एक पल मुस्कुराने के क़ाबिल हूँ शहर-ए-मदीना के कुत्तो का कुत्ता मैं ये भी नहीं हूँ बताने के क़ाबिल नकीरैन बस खोल दें मेरी आँखें नहीं उन को चेहरा दिखाने के क़ाबिल है जावेद फिर भी मुक़द्दर पे नाज़ाँ किया रब ने ना'तें सुनाने के क़ाबिल ना'त-ख़्वाँ: मुहम्मद अली फ़ैज़ी shah-e-dee.n ke naa'lain uThaane ke qaabil kahaa.n mera sar us KHazaane ke qaabil wo KHaak-e-dayaar-e-habeeb-e-KHuda hai kahaa.n meri aankhe.n lagaane ke qaabil abhi wo bula le.n mujhe ek pal me.n magar mai.n kahaa.n hu.n bulaane ke qaabil KHuda ki qasam wo bulaaenge mujh ko mai.n ho jaaunga jab bulaane ke qaabil mera zikr...