कौन है जो ये इल्तिजा न करे | दिल को उन से ख़ुदा जुदा न करे तज़मीन के साथ / Kaun Hai Jo Ye Iltija Na Kare | Dil Ko Un Se Khuda Juda Na Kare With Tazmeen
कौन है जो ये इल्तिजा न करे कौन उन के लिए मरा न करे कौन रो रो के ये दु'आ न करे दिल को उन से ख़ुदा जुदा न करे बेकसी लूट ले ख़ुदा न करे 'इश्क़ का सर पे डाल कर के ग़िलाफ़ बात अहल-ए-ख़िरद ये सुन लें साफ़ काम है कौन सा शरा' के ख़िलाफ़ इस में रौज़े का सज्दा हो कि तवाफ़ होश में जो न हो वो क्या न करे रात-दिन हम गुनह में डूबे हैं जुर्म जितने हैं सारे करते हैं फिर भी आक़ा करीम ऐसे हैं ये वही हैं कि बख़्श देते हैं कौन इन जुर्मों पर सज़ा न करे 'इश्क़ ने कर दिया मुझे मशहूर उन की यादों से ज़ेहन है मा'मूर मुझ को इस बात पे है फ़ख़्र ज़रूर दिल में रौशन है शम'-ए-'इश्क़-ए-हुज़ूर काश ! जोश-ए-हवस हवा न करे ज़ख़्म सीने के सारे सीने को जो यहाँ मर रहे थे जीने को ऐ वसी ! जाम-ए-'इश्क़ पीने को ले, रज़ा ! सब चले मदीने को मैं न जाऊँ अरे ख़ुदा न करे कलाम: इमाम अहमद रज़ा ख़ान तज़मीन: सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वी ना'त-ख़्वाँ: सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वी kaun hai jo ye iltija na kare kaun un ke liye mara na kare kaun ro ro ke ye du'aa na kare dil ko un se...